गिरजा, माधव, प्रचण्ड सब एक जैसे हैं

November 1, 2006 at 11:35 am 2 comments

-By Paramendra Bhagat 

िगिरजा, माधव, प्रचण्ड सब एक जैसे हैं। ये तीनों पहाडी बाहुन मधेसीके िवरूद्ध षडयन्त्र करना शुरु कर िदए हैं। वैसे षडयन्त्र बन्द ही कब िकए थे? लेिकन अब िफर कसके शुरु िकए हैं।२०४६ के संिवधानका सब कुछ एक एक कर के गायब िकया जा रहा है। जैसे िक राजतन्त्रकी समाप्ती, या शाही सेनाकी लोकतानिन्त्रकरण, आिद इत्यािद। लेिकन उस संिवधानके अन्तरगतके जो २०५ संसदीय सीट हैं उनको कायम रखनेकी सािजश हो रही है। िगिरजा, माधव, प्रचण्डका लोकतन्त्र एक व्यिक्त एक मतवाला लोकतन्त्र नहीं है। िगिरजा, माधव, प्रचण्डके लोकतन्त्रमें पहाडीको एक मत अौर मधेसीको आधा मत प्राप्त है।

दुखकी बात ये है िक ये तीनों मधेश से ही चुनाव लडेंगे, मधेश से ही चुनाव िजतेंगे अौर मधेश से ही राजस्व उसुल कर के मधेश पर ही शासन करेंगे। उसको उपिनवेशवाद कहते हैं। िगिरजा समाजवादी नहीं है, माधव मार्क्सवादी नहीं है, प्रचण्ड माअोवादी नहीं है। ये तीनो उपिनवेशवादी हंै।

एक समय हुवा करता था जब जगन्नाथ िमश्रा िबहारसे चुनाव िजत्ता था अौर मुख्यमन्त्री हुवा करता था। लेिकन हो गया उसका सफाया। ठीक उसी तरह इन तीनों का भी सफाया होना जरुरी है मधेशसे।

२०४६ के अान्दोलन के बारेमें गजेन्द्र नारायण िसंह कहा करते थे, पहाडी राजाने पहाडीयोको प्रजातन्त्र िदया, हम मधेशीयोको क्या िदया? अिप्रल क्रािन्तको भी हाइज्याक करने की सािजश कर रहे हैं ये पहाडी लोग।

६० लाख मधेशी को नागिरकता पत्रसे विञचत िकया गया है। वो नेपाली नही हैं, अगर िवदेशी हैं तो दे दो उनको अपनी जमीन वो जाके अलग देश खडा कर लेंगे। िकसीको नागिरकता पत्रसे विञचत करना मानव अिधकारका उलंघन है। राजाको तो ये लोग अन्तर्रािष्ट्रय न्यायालय नहीं ले जा सके, लेिकन प्रवासी मधेशी इनको नागिरकता पत्रके मुद्दे पर अन्तर्रािष्ट्रय न्यायालय ले जानेकी तयारी में जुटे हैं। संिवधान सभाके चुनावसे पहले अगर इन ६० लाख मधेशी को नागिरकता पत्र नहीं िदया जाता है तो ये लोग अपने अापको अन्तर्रािष्ट्रय न्यायालयके कठघरेमें खडे पाएंगे।

गावँ गावँमें अाठ दलीय सरकार बनाअो। अौर घर घर जाके नागिरकता पत्र िवतरण करो। अौर कोइ उपाय नहीं है तुम्हारे पास। नहीं तो देशमें अिप्रल क्रािन्त से बडी क्रािन्त िछडेगी। तब िसर्फ देखते ही रह जाअोगे।

संिवधान सभाके चुनावके िलए सबसे पहले तो २०४६ के संिवधानवाला २०५ संसदीय सीटको गोल करो। उसके बाद देशको बराबर जनसंख्यावाले कमसेकम ३०० सीटो में बाँडो। उसमें से ३३% सीट मिहला अारिक्शत सीट रहेंगे। उन मिहला अारिक्शत सीटों में से दो ितहाइ सीट दिलत, जनजाित अौर मधेशी मिहलाअोंके िलए रहेंगे। १७% सीट दिलत, जनजाित अौर मधेशीके िलए अारिक्शत रहेंगे। अौर प्रत्येक सीटमें प्रत्यक्श िनर्वाचन होगी।

मधेशी अब जग गए हैं। जो इस बातको माननेको तैयार नहीं हैं, उन सभीका मधेशसे पत्ता साफ होगा, अौर बहुत जल्द। वैसी अगर नौबत अाती है तो प्रत्येक पार्टी से मधेशी अलग हो जाएंगे अौर एक नयी पार्टी खोलेंगे। तब तो िबल्कुल सफाया। ये तीनों मधेश जाएंगे अौर वापस अाएंगे, वो भी खाली हात।
Source:: demrepubnepal.blogspot.com

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Case Study: Madhesi dalits are on no one’s agenda Where Is The Land To Distribute?

2 Comments Add your own

  • 1. Ajaya Dhakal  |  November 3, 2006 at 2:14 am

    Mr. Bhagat I appreciate your language ability and I don’t want to make comment on the behaviours of our leaders. But who do you think is right leader? My knowledge says, there should be only one leader (everywehere) ultimately. It may come from your community or somebody else’ community. If you wanna make fraction between pahadia’s and madhesi’s, I hate you. We need to punish those leaders who create such situations and those critiques who make the environment conducive.

  • 2. Ananta Risal  |  November 4, 2006 at 5:02 pm

    If whatever Paramendra is saying true – then I agree Tarain – Madhesis are being deprived and underpriviledged citizen of Nepal and they need extra attention. make sure that they are treated very well in the main stream Nepali population. There are so many great landmarks in Terai of Nepal that why are they not being explored and made more economic sense/advantage out of them.? Again un-structures government and un-democratic decisions?? Wake up Tarai basi haru – you’re the brave Farmers, Religious, Cultural pillars of the Nation ! Sita, Lord Buddha and great saints are from your land. Fight againt India for our own pride !

    Chitwan Nation Park is in Tarai, All Highways are in Terai – let’s help terai basis to connect whole Nepal ….so that we don;t need to fully depend on India for land – highways ??

    Great write up – good work Paramendra !! Do some more research about Tarai and provide more resources of Tarai to main stream Pahadis?

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