स्वशासन की मांग कुचलने नेपाल चला चीन की राह

November 6, 2006 at 11:00 am 5 comments

गोरखपुर [नवनीत प्रकाश त्रिपाठी]।

मधेशियों द्वारा स्वायत्त शासन या सेना व शासन में भागीदारी के लिए उठाई जा रही आवाज को दबाने के लिए नेपाल, चीन की राह चल पड़ा है। बताते हैं कि माओवादी वर्चस्व वाली नेपाली सरकार ने मैदानी क्षेत्र में मधेशियों के दबदबे को कम करने के लिए इस क्षेत्र में पहाडि़यों को बसाने की रणनीति बनाई है।
   माओवादी नेता मातृका यादव की देखरेख में बुटवल और कजरौट में नेपाल सरकार ने इस योजना पर अमल करना भी शुरू कर दिया है। वहीं सीमा पर सक्रिय खुफिया विभाग का मानना है कि पड़ोसी मुल्क की सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम का भारत के सीमाई इलाके की सामाजिक संरचना पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। नेपाल सरकार द्वारा मैदानी इलाके में जोर-शोर से चलाई जा रही इस योजना के संबंध में सीमा पर सक्रिय खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए सरकार ने पहाड़ से आकर तराई क्षेत्र में बसने वाले पहाडि़यों को मुफ्त जमीन देने और पहाड़ की तुलना में चार गुना अधिक वेतन पर नौकरी देने की घोषणा की है। नेपाल की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि वहां की सरकार ने यह कदम मधेशियों द्वारा लोकतांत्रिक मधेशी मोर्चा के बैनर तले स्वायत्त शासन या नेपाल की सेना और सत्ता में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग करने पर चीन से प्रेरणा लेकर उठाया है। यह मांग नेपाल में राजशाही के पतन के बाद मधेशियों ने उठानी शुरू की है।
   उल्लेखनीय है कि सोवियत रूस के मुसलिम बहुल प्रदेश अर्बेनिया और उजबेकिस्तान धार्मिक आधार पर उससे अलग हो गए थे। इसी आधार पर चेचेन्या में अलगाव की आवाज ने काफी जोर पकड़ा। इससे प्रेरित होकर चीन के मुस्लिम बहुल प्रान्त जिंगज्यांग में अलगाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई। इसे दबाने के लिए चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने दूरगामी कदम उठाते हुए इस प्रांत की आबादी को संतुलित करने की योजना तैयार की। चीन सरकार ने जिंगज्यांग प्रान्त में बड़े पैमाने पर गैर मुस्लिमों को बसाने का फैसला किया। इस योजना के तहत नौकरी के इच्छुक दूसरे प्रांतों के गैर मुस्लिम युवकों को अपने परिवार के साथ जिंगज्यांग प्रान्त में बसने पर मुफ्त जमीन और चार गुना अधिक वेतन पर नौकरी देने का लालच दिया गया। इसी तरह जिंगज्यांग प्रांत के मुसलमानों को दूर-दराज के दूसरे प्रान्तों में नौकरी करने पर ऐसे ही पैकेज की घोषणा की। परिणाम स्वरूप जिंगज्यांग प्रान्त से बड़ी संख्या में मुस्लिम दूसरे प्रांतों में जाकर बस गए और जिंगज्यांग प्रांत में गैर मुस्लिम आ गए। इस तरह आबादी का संतुलन बना कर चीन ने इस प्रांत में विरोध का स्वर उठने से पहले ही दबा दिया।
   गौरतलब है कि नेपाल में माओवादी गतिविधियों के गति पकड़ने के बाद के साथ ही भारतीय मूल के नेपालियों (मधेशी) की मुश्किलें बढ़ने लगी थीं। राजशाही में काम व व्यापार की आजादी के कारण नेपाल की आबादी का यह सबसे बड़ा वर्ग न तो कभी अपने अधिकारों के प्रति सजग हुआ और न ही इसकी मांग की। माओवादी गतिविधियों के तेज होने के साथ जैसे-जैसे इनकी मुश्किलें बढ़ने लगी वैसे-वैसे यह वर्ग अपने हितों के प्रति जागरूक हुआ। माओवादी हमलों से बचने के लिए इन लोगों ने प्रतिकार टोली का गठन तक कर डाला।
   नेपाल में राजशाही के पतन और माओवादी वर्चस्व वाली सरकार के गठन के बाद मुख्यधारा में लौट रहे नेपाल में रहने वाले मधेशियों ने स्वायत्त शासन या सेना और सत्ता में भागीदारी के लिए अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी। इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए सरकार ने गरीबों को आवास के लिए मुफ्त जमीन मुहैया कराने वाली सरकारी संस्था लुकुमवासी संघ द्वारा तराई क्षेत्र में अधिग्रहित भूमि का 25 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी नेपालियों को आवंटित करना अनिवार्य कर दिया है।
   माओवादी नेता मातृका यादव के देखरेख में इस योजना पर काम भी शुरू कर दिया गया है। पिछले दिनों उनकी मौजूदगी में नेपाल के बुटवल और कजरौटा आदि क्षेत्रों में पहाड़ के 300 से अधिक नेपालियों को भूमि भी आवंटित की जा चुकी है। यहां बताते चलें के तराई क्षेत्र की आबादी का 75 प्रतिशत जहां मधेशी है वहीं 25 प्रतिशत आबादी पहाडि़यों की है। इस क्षेत्र में 25 प्रतिशत पहाडि़यों को बसा कर आबादी के इस असंतुलन को कम करने की योजना नेपाल सरकार ने बनाई है।

Source::http://www.jagran.com/special/inner.aspx?idfeature=300

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लोकतन्त्रमा मधेश परमेन्द्रको पढनेके बाद

5 Comments Add your own

  • 1. Bal Krishna Jha  |  November 6, 2006 at 12:18 pm

    Time and again, this practice of dominating the madhesi community is existing.
    The problem is going to be fine only when the attacked community is empowered with both knowledge and moeny power.

  • 2. Dr Bindeshwar Prasad Yadav  |  November 7, 2006 at 2:50 pm

    Madheshis need COURAGE & DETERMINATION. Courage and determination are almighty. RIGHTS & FREEDOM comes from courage and determination.
    B P Yadav

  • 3. sbs  |  November 7, 2006 at 4:55 pm

    We need federal structure in Nepal. There is no doubt about this. Upliftment of Terains is not possible from Kathmandu. Madheshis must be self-governing and looking after their developments. But, you can not control immigration of Pahadis in Madhesh. Neither the Newars of Kathmandu can control an influx of other Nepalese into Kathmandu. We are living in different world now. However, my support is with you if it is limited to federal structure of the country.

  • […] There is a posting on Nov 6, 2006 on https://madhesi.wordpress.com . The Posting is स्वशासन की मांग कुचलने नेपाल चला चीन की राह . On this post, different Madhesi intellectual people have shown these concerns and reactions. […]

  • 5. Dr BN Yadav  |  November 17, 2006 at 3:35 pm

    Perhaps I even thought the same that the SPA and maoist accord is nothing but a conspiracy against madhesi people and this is true also.If any one does not beleive they will see and beleive it shortly.

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